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सितंबर, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कैसे ज्ञान में ज्ञान नहीं है, ध्यान में ज्ञान है।?

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शास्त्रों में कथा आती है तुलाधर वैश्य की। एक ज्ञानी बहुत दिन तक ध्यान करता रहा पहाड़ों में। इतना ध्यान किया,इतना तप किया, ऐसा खड़ा रहा पत्थर की मूर्ति बनकर कि उसके बालों में घोंसले बना लिये पक्षियों ने। जटाजूट थे,घोंसले रख लिये, बच्चे दे दिये। वह ज्ञानी बड़ा प्रसन्न हुआ। उसकी दूर-दूर तक ख्याति पहुंच गई। लोगों से वह कहने लगा, मैं वही हूं जिसके सिर में जटाजूट में घोंसले बना लिये,ऐसा मेरा ध्यान है। लेकिन कोई परिव्राजक उसके पास से गुजरता था। उसने कहा, लेकिन वे पक्षी कहां हैं? उसने कहा, वे तो मैं जरा हिला कि उड़ गये। 'तो उन पक्षियों को बुलाओ।’ उसने कहा कि वे मेरे बुलाये नहीं आते। मैं तो उनके पास भी जाता हूं—वे यहीं रहते हैं, आसपास बैठे रहते हैं—मैं उनके पास जाता हूं तो एकदम भाग जाते हैं। तो उन्होंने कहा, यह कोई बात न हुई। तुम तुलाधर वैश्य के पास जाओ। उसने कहा, यह कौन है? एक तो वैश्य शब्द से ही उसको बड़ी हैरानी हुई। वह ब्राह्मण था। विप्र! और बड़ा ज्ञानी था और तपस्वी था और कोई बनिया, वैश्य! तुलाधर! और कहां का नाम? क्या करता है यह? उन्होंने कहा वह कुछ नहीं करता, वह तराजू ही तौलता रहत...

जब भी तुम्‍हारे मनमें कामवासना उठे तो क्या करोगे?

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मूलबंध : ब्रह्मचर्य उपलब्धि की सफलतम विधि -- ओशो: जीवन ऊर्जा है, शक्ति है। लेकिन साधारणत: तुम्‍हारी जीवन-ऊर्जा नीचे की और प्रवाहित हो रही है। इसलिए तुम्‍हारी सब जीवन ऊर्जा अनंत वासना बन जाती है। कामवासना तुम्‍हारा निम्‍नतम चक्र है। तुम्‍हारी ऊर्जा नीचे गिर रही है। और सारी ऊर्जा काम केन्‍द्र पर इकट्ठी हो जाती है। इस लिए तुम्‍हारी सारी शक्ति कामवासना बन जाती है।  एक छोटा सा प्रयोग,  जब भी तुम्‍हारे मनमें कामवासना उठे तो, डरो मत शांत होकर बैठ जाओ। जोर से श्‍वास को बहार फेंको—उच्‍छवास। भीतर मत लो श्‍वास को— क्‍योंकि जैसे भी तुम भीतर गहरी श्‍वास को लोगे, भीतर जाती श्‍वास काम ऊर्जा को नीचे की धकाती है। जब सारी श्‍वास बहार फिंक जाती है, तो तुम्‍हारा पेट और नाभि‍ वैक्‍यूम हो जाती है, शून्‍य हो जाती है। और जहां कहीं शून्‍य हो जाता है, वहां आसपास की ऊर्जा शून्‍य की तरफ प्रवाहित होने लगती है। शून्‍य खींचता है, क्‍योंकि प्रकृति शून्‍य को बरदाश्‍त नहीं करती, शून्‍य को भरती है। तुम्‍हारी नाभि के पास शून्‍य हो जाए, तो मूलाधार से ऊर्जा तत्‍क्षण नाभि की तरफ अठ जाती है, और तुम्‍हें ...

डोरोथी मैककॉय, द्वारा लिखित, "द मैनिपुलेटिव मैन",

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डोरोथी मैककॉय द्वारा लिखित "द मैनिपुलेटिव मैन" पारस्परिक संबंधों में हेरफेर की एक आकर्षक खोज है, विशेष रूप से हेरफेर करने वाले व्यक्तियों के व्यवहार और रणनीति पर ध्यान केंद्रित करती है। मैककॉय का उद्देश्य पाठकों, विशेष रूप से महिलाओं को हेरफेर करने वाले व्यवहारों को पहचानने और खुद को बचाने के लिए रणनीति विकसित करने में मदद करके उन्हें सशक्त बनाना है। यहाँ पुस्तक से दस प्रमुख सबक और अंतर्दृष्टि दी गई हैं: 1. हेरफेर को पहचानना: मैककॉय ने हेरफेर करने वाले व्यवहारों को जल्दी पहचानने के महत्व पर जोर दिया है। वह हेरफेर करने वाले व्यक्तियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली विभिन्न रणनीतियों का वर्णन करती है, जिसमें अपराध-बोध, गैसलाइटिंग और भावनात्मक ब्लैकमेल शामिल हैं। इन व्यवहारों को समझना हेरफेर से खुद को बचाने की दिशा में पहला कदम है। 2. प्रेरणाओं को समझना: पुस्तक हेरफेर करने वाले व्यवहार के पीछे की प्रेरणाओं पर गहराई से चर्चा करती है। मैककॉय बताते हैं कि हेरफेर करने वाले व्यक्ति अक्सर नियंत्रण, शक्ति या मान्यता चाहते हैं। इन प्रेरणाओं को समझकर, पाठक ऐसे व्यक्तियों के स...

मेग मीकर द्वारा लिखित "स्ट्रॉन्ग मदर्स, स्ट्रॉन्ग सन्स" एक सम्मोहक पुस्तक।

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मेग मीकर द्वारा लिखित "स्ट्रॉन्ग मदर्स, स्ट्रॉन्ग सन्स" एक सम्मोहक पुस्तक है जो माँ-बेटे के रिश्ते की अनूठी गतिशीलता की खोज करती है और माताओं को आत्मविश्वासी, लचीले और भावनात्मक रूप से स्वस्थ बेटों की परवरिश करने में मदद करने के लिए अमूल्य मार्गदर्शन प्रदान करती है। मीकर माताओं को उनके बेटों के जीवन में प्राथमिक प्रभावक के रूप में उनकी भूमिका में सशक्त बनाने के लिए व्यावहारिक सलाह और अंतर्दृष्टि प्रदान करती है। यहाँ पुस्तक से सबक दिए गए हैं: 1. कनेक्शन की शक्ति: मीकर बेटों के साथ एक मजबूत भावनात्मक संबंध बनाने के महत्व पर जोर देती है। वह एक साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने, खुली बातचीत में शामिल होने और एक गहरे बंधन को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से सुनने के महत्व पर प्रकाश डालती है। 2. माताओं का प्रभाव: पुस्तक माताओं के अपने बेटों के जीवन पर पड़ने वाले शक्तिशाली प्रभाव की खोज करती है। मीकर माताओं को एक सकारात्मक और मार्गदर्शक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है, जो उनके बेटों के चरित्र, मूल्यों और आत्म-सम्मान को आकार देती है। 3. ल...

मनन शब्द को समझें।

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मनन शब्द को समझें। विचार और मनन दोनों ही मन की क्रियाएं हैं, पर दोनों बड़ी भिन्न हैं। भिन्न ही नहीं, वरन विपरीत भी। एक तैरने वाले को देखें–एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है, लेकिन रहता नदी की सतह पर है। अ से ब, ब से स स्थान बदलता है, गहराई नहीं बदलती। फिर पानी में डुबकी लगाने वाले को देखें–वह भी स्थान बदलता है, लेकिन गहराई बदलती है; अ से अ एक, अ दो, अ तीन–एक ही स्थान पर गहरा उतरता है डुबकी लगाने वाला। तैरने वाला एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है, गहराई में नहीं जाता है। विचार तैरने जैसा है, मनन डुबकी जैसा है। विचार में एक शब्द से दूसरे शब्द पर हम जाते हैं; मनन में एक ही शब्द की गहराई में जाते हैं। स्थान नहीं बदलता, गहराई बदलती है। विचार रेखाबद्ध प्रक्रिया है, सतह वही बनी रहती है। तुम चाहे दुकान की बात सोचो, चाहे मोक्ष की; सतह में कोई फर्क नहीं पड़ता, रहते तुम पानी की सतह पर ही हो। तुम चाहे परमात्मा के संबंध में सोचो और चाहे पत्नी के, सोच की सतह वही बनी रहती है। मनन से सतह की जगह गहराई में यात्रा शुरू होती है। मनन में एक ही शब्द को उसकी समस्तता में, उसके गहरे तलों तक प्रवेश ...

क्या है,सम्यक आहार, सम्यक व्यायाम, सम्यक निद्रा ?

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प्रश्न. ओशो, यहां तो खाने की इच्छा ज्यादा होती है। हां खाने की इच्छा ही भोजन को असम्बक कर देती है। भोजन कितना जरूरी है, यह एक तरफ रह जाता है और खाने का रस ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। हममें से बहुत ही कम —लोग शरीर को भोजन देते हैं, हममें से अधिक लोग स्वाद को भोजन देते हैं। स्वाद शरीर की आवश्यकता नहीं है। स्वाद हमारे मन की वासना है। और स्वाद के कारण हम ज्यादा खा लेते हैं। थोड़ा होशपूर्वक करेंगे तो ऐसा नहीं होगा। थोड़ा होशपूर्वक करेंगे और इतना स्मरण रखेंगे कि शरीर के लिए भी हितकर हो, मन के लिए भी हितकर हो, तो बहुत कठिन बात नहीं है। यानी इतनी कठिन बात नहीं है जितना हम सोचते हैं। फिर अगर ज्यादा खाने की इच्छा होती हो तो ज्यादा अच्छा है कि बहुत चबा कर खाएं। तो आप ज्यादा देर तक खाएंगे। आखिर ज्यादा देर तक एक आदमी आधा घंटे तक खाना खाने में क्या रस पाता होगा? आधा घंटे तक उसको स्वाद का अनुभव होता है। तो जितना भोजन आप पंद्रह मिनट में कर लेते हैं, उतने भोजन को आधा घंटे में चबा कर करें। तो आपको रस आधा घंटे भोजन करने का मिलेगा और लाभ बहुत ज्यादा हो जाएंगे। लाभ बहुत ज्यादा ये हो जाएंगे, वह ...

ब्रायन विएस्ट की पुस्तक "द माउंटेन इज़ यू: ट्रांसफ़ॉर्मिंग सेल्फ़-सबोटेज इनटू सेल्फ़-मास्टरी" से 10 सबक

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इस अवधारणा की खोज करते हैं कि हमारी सबसे बड़ी चुनौतियाँ और बाधाएँ अक्सर हमारे भीतर ही निहित होती हैं। यह पुस्तक आत्म-तोड़फोड़ के मनोविज्ञान में गहराई से उतरती है, आंतरिक बाधाओं पर काबू पाने और व्यक्तिगत विकास प्राप्त करने के लिए अंतर्दृष्टि और व्यावहारिक रणनीतियाँ प्रदान करती है। 1. आत्म-तोड़फोड़ को समझना: विएस्ट बताते हैं कि आत्म-तोड़फोड़ अक्सर एक रक्षा तंत्र होता है जो विफलता, सफलता या परिवर्तन के डर से उत्पन्न होता है। इन पैटर्न को पहचानना उन पर काबू पाने की दिशा में पहला कदम है। यह समझकर कि हम खुद को क्यों नुकसान पहुँचाते हैं, हम इन व्यवहारों को खत्म करना शुरू कर सकते हैं। 2. असुविधा को गले लगाना: लेखक इस बात पर ज़ोर देते हैं कि विकास के लिए अक्सर हमारे आराम क्षेत्र से बाहर निकलने की आवश्यकता होती है। असुविधा परिवर्तन प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा है, और इसे गले लगाना सीखना महत्वपूर्ण व्यक्तिगत विकास की ओर ले जा सकता है। 3. सीमित विश्वासों की पहचान करना: विएस्ट पाठकों को अपने सीमित विश्वासों को पहचानने और उन्हें चुनौती देने के लिए प्रोत्साहित करते हैं - ऐसे विचा...

कैसे,हम भी घबरा जायेंगे, अगर कोई काम न बचे ?

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हमने कहानियां सुनी हैं कि अगर कोई भूत-प्रेत की दोस्ती बना ले तो वह काम मांगता है। उसे काम चाहिए। मैंने सुना है एक आदमी ने एक प्रेत को जगा दिया। उस प्रेत ने जगते समय उससे एक शर्त कर ली थी--मुझे काम चाहिए, मैं बिना काम के न रह सकूंगा। अगर कहीं प्रेत होते हैं तो जरूर उसने यह शर्त की होगी, क्योंकि प्रेत के पास शरीर नहीं रह जाता, सिर्फ मन ही रह जाता है। उसे काम चाहिए। विश्राम की उसे जरूरत ही नहीं रही।  शरीर को विश्राम भी चाहिए, मन को विश्राम की जरूरत ही नहीं। इसलिए जब शरीर भी सो जाता है रात, तब भी मन सपनों में काम करता रहता है। सपने मन के काम की दुनिया है। जब शरीर भी थक कर गिर पड़ा है, तब भी मन थकता नहीं! वह तो सपने देखना शुरू कर देता है। और जो काम दिन में न किये हों, उनको रात सपने में कर लेता है! आदमी के रात के सपने देखकर हम बता सकते हैं कि इस आदमी ने दिन में किन-किन कामों से अपने को रोका। अगर किसी ने उपवास किया है तो उसके सपने से पता चल जायेगा, क्योंकि रात वह भोजन करेगा। अगर किसी ने संयम साधा है तो रात वह भोग करेगा। और किसी ने अगर दिन में क्रोध रोका है तो रात वह क्रोध कर ले...

क्या मनुष्य फिर से पशु योनि में जा सकता है?

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एक मित्र ने पूछा है कि उनके कोई मित्र हैं वे योगी हैं और कहते हैं कि पिछले जन्म में वे चिड़िया थे तो क्या आदमी पशु भी हो सकता है? आदमी कभी पशु हो सकता है, लेकिन दुबारा पशु नहीं हो सकता। पीछे लौटना नहीं होता, पीछे लौटना असंभव है। तो यह तो हो सकता है कि पीछे की योनि में से आगे आना हो, लेकिन यह नहीं हो सकता कि आगे की योनि में से पीछे लौटना पड़े। इस जगत में पीछे लौटना होता ही नहीं, पीछे लौटने का उपाय ही नहीं है। दो ही उपाय हैं--या तो आगे बढ़े, या जहां हैं वहां ही रुक जाएं। पीछे नहीं लौट सकते। जैसे स्कूल में बच्चा पहली कक्षा में पढ़ता है। वह उत्तीर्ण हो जाए तो दूसरी कक्षा में चला जाए, और अनुत्तीर्ण हो जाए तो पहली कक्षा में ही रह जाए, लेकिन पहली कक्षा से उसे निकालने का कोई उपाय नहीं है। जब दूसरी कक्षा में कोई असफल हो जाए, तो उसे पहली कक्षा में उतारने का भी कोई उपाय नहीं। तो जिस योनि में हम होते हैं, हम या तो उस योनि में टिक सकते हैं बहुत लंबे समय तक, या हम आगे जा सकते हैं, लेकिन पीछे नहीं लौट सकते। तो इसकी कोई बहुत कठिनाई नहीं है कि कोई पीछे पशु योनि में रहा हो। रहा ही है। कितने जन्म...

साधारणत: हम भीड़ में क्यों जीते हैं ?

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एक मक्खी भी तुम्हारे ऊपर बैठ गई है, उसे भी उड़ाना हो तो अत्यंत करुणापूर्वक उड़ाओ। उस अवसर को भी मत चूको, क्योंकि जितनी-जितनी ऊर्जा करुणा में परिणत हो जाए, उतनी-उतनी ऊर्जा क्रोध को मिलनी बंद हो जाएगी। ऊर्जा वही है; क्रोध को देते हो तो क्रोध पलता है, करुणा को देते हो तो करुणा पलती है। बुद्ध के जीवन-सूत्रों में उपेक्षा बड़ी महत्वपूर्ण है। वे कहते हैं, जिस चीज से मुक्त होना हो, उस तरफ पीठ कर लो। दबाने की जरूरत नहीं है, सिर्फ उपेक्षाभाव रखने की जरूरत है। अपने को वहा से शिथिल कर लो। है माना, लेकिन सारी ऊर्जा विपरीत छोर पर बहने लगे तो धीरे-धीरे तुम पाओगे, कि जो शक्ति क्रोध को मिलती थी, वह बची ही नहीं। इसे तुम थोड़ा करके देखो। क्रोध से जूझो भी मत। अगर कामवासना से पीड़ित हो तो कामवासना से जूझो मत, अन्यथा वह बढ़ती चली जाती है। जितने तुम लड़ोगे, उतना ही तुम पाओगे, घाव गहरे होते चले जाते हैं। और बार-बार हारोगे तो धीरे-धीरे आत्मविश्वास भी खो जाएगा। और आत्मविश्वास खो जाए तो साधक बुरी तरह भटक जाता है। लड़ो भी मत। 'पंडित अशुभ को छोड़कर शुभ का ध्यान करे और बेघर होकर ऐसे एकांत में वास करे जहां क...

जो थॉमसेट की पुस्तक "ब्रेकथ्रू" से 10 सबक एक प्रेरक मार्गदर्शिका है

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जो थॉमसेट की पुस्तक "ब्रेकथ्रू" से 10 सबक एक प्रेरक मार्गदर्शिका है जो महत्वपूर्ण व्यक्तिगत और व्यावसायिक सफलताओं को प्राप्त करने के पीछे के सिद्धांतों और रणनीतियों की खोज करती है। थॉमसेट ने मनोविज्ञान, तंत्रिका विज्ञान और व्यवसाय से अंतर्दृष्टि को पाठकों को उनकी क्षमता को अनलॉक करने और उनके जीवन में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने में मदद करने के लिए जोड़ा है। यहाँ पुस्तक से दस प्रमुख सबक और अंतर्दृष्टि दी गई हैं: 1. सफलताओं को समझना: थॉमसेट सफलता को महत्वपूर्ण परिवर्तन या प्रगति के क्षण के रूप में परिभाषित करते हैं जो किसी के जीवन को बदल देता है। वह इस बात पर जोर देते हैं कि सफलताएँ केवल यादृच्छिक घटनाएँ नहीं हैं; उन्हें जानबूझकर प्रयास और सही मानसिकता के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। 2. मानसिकता की शक्ति: पुस्तक में एक केंद्रीय विषय विकास मानसिकता को अपनाने का महत्व है। थॉमसेट का तर्क है कि सफलता प्राप्त करने के लिए सीखने और सुधार करने की अपनी क्षमता पर विश्वास करना महत्वपूर्ण है। एक निश्चित मानसिकता से विकास-उन्मुख दृष्टिकोण में स्थानांतरित करके, व्यक्ति चुनौतियो...

जीने का क्या अर्थ?

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जीने का इतना ही अर्थ है कि ‘ईग्जस्ट’ करते है। हम दो रोटी खा लेते है, पानी पी लेते है। और कल तक के लिए जी लेते है। लेकिन जीना ठीक अर्थों में तभी उपलब्ध होता है जब हम ‘एफ्ल्युसन्स’ को, समृद्धि को उपलब्ध हो। जीवन का अर्थ है ‘ओवर फ्लोइंग’ जीने का अर्थ है, कोई चीज हमारे ऊपर से बहने लगे। एक फूल है। आपने कभी ख्याल किया है कि फूल कैसे खिलता है पौधे पर? अगर पौधे को खाद न मिले, ठीक पानी न मिले, तो पौधा जिंदा रहेगा, लेकिन फूल नहीं खिलायेगे। फूल ‘ओवर फ्लोइंग’ है। जब पौधे में इतनी शक्ति इकट्ठी हो जाती है कि अब पत्तों को, शाखाओं को, जड़ों को कोई आवश्यकता नहीं रह जाती है। तब पौधे के पास कुछ अतिरिक्त इकट्ठा हो जाता है। तब फूल खिलता है। फूल जो है, वह अतिरक्ति है, इसलिए फूल सुन्दर है। वह अतिरेक है। वह किसी चीज का बहुत हो जाने के बहाव से है। जीवन में सभी सौंदर्य अतिरेक है। जीवन सौंदर्य ‘ओवर फ्लोइंग’ है, ऊपर से बह जाना है। जीवन के सब आनंद भी अतिरेक है। जीवन में जो भी श्रेष्ठ है, वह सब ऊपर से बह जाता है। महावीर और बुद्ध राजाओं के बेटे है, कृष्णा और राम राजाओं के बेटे है। ये ‘ओवर फ्लोइंग’ है। ये...

रॉय डॉकरी द्वारा लिखित द आर्ट ऑफ़ लीडिंग, नेतृत्व के सिद्धांतों की व्यापक खोज

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रॉय डॉकरी द्वारा लिखित द आर्ट ऑफ़ लीडिंग, नेतृत्व के सिद्धांतों की व्यापक खोज प्रदान करती है, जिसमें सैद्धांतिक अंतर्दृष्टि को व्यावहारिक सलाह के साथ मिश्रित किया गया है। पुस्तक उन व्यक्तिगत गुणों को संबोधित करती है जो एक प्रभावी नेता बनाते हैं और टीमों का सफलतापूर्वक नेतृत्व करने के लिए आवश्यक रणनीतियों को भी। रॉय इस बात पर ज़ोर देते हैं कि नेतृत्व का मतलब सिर्फ़ लोगों का प्रबंधन करना ही नहीं है, बल्कि व्यक्तियों और संगठनों दोनों में विकास को प्रभावित करना, प्रेरित करना और बढ़ावा देना भी है। पुस्तक से कुछ महत्वपूर्ण सबक इस प्रकार हैं: 1. प्रभाव के रूप में नेतृत्व: रॉय नेतृत्व को दूसरों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने की क्षमता के रूप में परिभाषित करते हैं, न कि सिर्फ़ अधिकार जताने के रूप में। रॉय के अनुसार, सच्चा नेतृत्व दूसरों को निर्देशों या आदेशों के बजाय उदाहरण और दृष्टि के माध्यम से अनुसरण करने के लिए प्रेरित करने के बारे में है। 2. नेतृत्व शैलियों में बहुमुखी प्रतिभा: पुस्तक में एक महत्वपूर्ण विषय बहुमुखी प्रतिभा की आवश्यकता है। रॉय का तर्क है कि कोई भी एकल नेतृ...

अहंकार से छुटकारा कैसे पाएं ?

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अहंकार  मैं तुम्हें तुम्हारे अहंकार से मुक्त नहीं करवा सकता कोई तुम्हें नहीं करवा सकता। तुम चाहो तो हो सकते हो। तुम न चाहो तो कोई उपाय नहीं है। तुम चाहो तो जरूर हो सकते हो। लेकिन चाह को बड़ी गहरी क्रांति से गुजरना होगा। पहला नियम है अहंकार से मुक्त होने का कि तुम पहले मुक्त होने की चेष्टा न करो; इस चेष्टा के बजाय अपने अहंकार की सारी सूक्ष्म गतिविधियों को पहचानो कि कहां कहां से अहंकार मजबूत होता है; कैसे  कैसे मजबूत होता है; कैसे  कैसे तर्क खोजता है; कैसी कैसी तरकीबें निकालता है। उन सारी तरकीबों को अगर तुम जाग कर देखने लगो तो धीरे  धीरे तुम पाओगे : जैसे  जैसे तुम जागने लगे वैसे  वैसे अहंकार क्षीण होने लगा। अहंकार कुछ है नहीं। तुम अपने को धोखा दे रहे हो। अब तुम ही अपने को धोखा देना चाहते हो तो बड़ी कठिनाई है। कोई सोया हो तो जगा दो; लेकिन कोई पड़ा हो जागा हुआ और सोने का बहाना कर रहा हो तो कैसे जगाओगे! तुम धक्का दो, वह करवट लेकर फिर पड़ा रहेगा। सोये आदमी को जगाया जा सकता है, जागे हुए को, जो सोने का बहाना कर रहा है, कैसे जगाओगे! कोई उपाय नहीं है। अहंकार ...

कैसे व्यक्ति को भी जीवन केंद्रों को विकसित करना है?

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जिस व्यक्ति को भी जीवन केंद्रों को विकसित करना है और प्रभावित करना है, उसे पहली बात है, रिदमिक ब्रीदिंग, उसके लिए पहली बात है, लयबद्ध श्वास। चलते उठते बैठते इतनी लयबद्ध, इतनी शांत, इतनी गहरी श्वास कि श्वास का एक अलग संगीत, एक अलग हार्मनी दिन रात उसे मालूम होने लगे। आप चल रहे हैं रास्ते पर, कोई काम तो नहीं कर रहे हैं। बड़ा आनदपूर्ण होगा कि आप गहरी, शांत, धीमी और गहरी और लयबद्ध श्वास लें। दो फायदे होंगे। जितनी देर तक लयबद्ध श्वास रहेगी, उतनी देर तक आपका चिंतन कम हो जाएगा, उतनी देर तक मन के विचार बंद हो जाएंगे। अगर श्वास बिलकुल सम हो, तो मन के विचार एकदम बंद हो जाते हैं, शांत हो जाते हैं। श्वास मन के विचारों को बहुत गहरे, दूर तक प्रभावित करती है। और श्वास ठीक से लेने में कुछ भी खर्च नहीं करना होता है। और श्वास ठीक से लेने में कोई समय भी नहीं लगाना होता है। श्वास ठीक से लेने में कहीं से कोई समय निकालने की भी जरूरत नहीं होती है। आप ट्रेन में बैठे हैं, आप रास्ते पर चल रहे हैं, आप घर में बैठे हैं धीरे धीरे अगर गहरी, शांत श्वास लेने की प्रक्रिया जारी रहे तो थोड़े दिन में यह प्रक्रिया...

कॉन्फिडेंस" पुस्तक से 10 सबक, मार्टिन मीडोज आत्मविश्वास की प्रकृति का पता लगाते हैं,

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"कॉन्फिडेंस" पुस्तक से 10 सबक, मार्टिन मीडोज आत्मविश्वास की प्रकृति का पता लगाते हैं, पाठकों को जीवन के विभिन्न पहलुओं में अपने आत्मविश्वास को बनाने और बढ़ाने के लिए व्यावहारिक रणनीतियाँ प्रदान करते हैं। पुस्तक इस बात पर जोर देती है कि आत्मविश्वास एक जन्मजात विशेषता नहीं है, बल्कि एक कौशल है जिसे लगातार अभ्यास और मानसिकता में बदलाव के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। 1. आत्मविश्वास को समझना: मीडोज आत्मविश्वास को किसी की क्षमताओं और निर्णय में विश्वास के रूप में परिभाषित करके शुरू करते हैं। वह बताते हैं कि जोखिम लेने, चुनौतियों का सामना करने और लक्ष्यों का पीछा करने के लिए आत्मविश्वास आवश्यक है। इस मूलभूत अवधारणा को समझने से पाठकों को अपने जीवन में आत्मविश्वास बनाने के महत्व को पहचानने में मदद मिलती है। 2. मानसिकता मायने रखती है: लेखक आत्मविश्वास विकसित करने में विकास मानसिकता के महत्व पर जोर देता है। यह विश्वास करके कि प्रयास और सीखने के माध्यम से कौशल और क्षमताओं में सुधार हो सकता है, व्यक्तियों के चुनौतियों का सामना करने और असफलताओं का सामना करने पर दृढ़ रहने...

कैसे नौकरी बदलने के बारे में सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए?

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नौकरी बदलना एक महत्वपूर्ण निर्णय हो सकता है। यहाँ कुछ कदम दिए गए हैं जो आपको सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद करेंगे: 1. आत्म-चिंतन: अपने मूल्यों और लक्ष्यों को पहचानें: नौकरी में आपके लिए क्या महत्वपूर्ण है? आप अपने करियर में क्या हासिल करना चाहते हैं? अपने कौशल और ताकत का आकलन करें: आप किसमें अच्छे हैं? आपको क्या करने में मज़ा आता है? अपनी कार्यशैली पर विचार करें: क्या आप तेज़ गति या धीमे वातावरण को पसंद करते हैं? क्या आप स्वतंत्र रूप से या टीम में अच्छा काम करते हैं? 2. शोध करें: संभावित नई भूमिकाएँ तलाशें: अलग-अलग नौकरी के शीर्षक और उद्योगों पर शोध करें जो आपकी रुचियों और लक्ष्यों के साथ संरेखित हों। कंपनियों की जाँच करें: कंपनी की संस्कृति, मूल्यों और विकास के अवसरों पर नज़र डालें। नौकरी के बाज़ार पर विचार करें: मौजूदा नौकरी के बाज़ार के रुझान और अपने इच्छित कौशल की माँग को समझें। 3. अपनी वर्तमान नौकरी का मूल्यांकन करें: फ़ायदे और नुकसान की सूची बनाएँ: आपको अपनी वर्तमान नौकरी के बारे में क्या पसंद है और क्या नापसंद?  वेतन, लाभ, कार्य-जीवन संतुलन, नौकरी से संतुष्टि और ...

पेमा चोड्रोन की "द विजडम ऑफ नो एस्केप: एंड द पाथ ऑफ लविंग काइंडनेस" "पलायन" की अवधारणा को चुनौती देती है।

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पेमा चोड्रोन की "द विजडम ऑफ नो एस्केप: एंड द पाथ ऑफ लविंग काइंडनेस" "पलायन" की अवधारणा को चुनौती देती है, यह प्रस्तावित करती है कि सच्ची शांति कठिनाइयों से बचने में नहीं, बल्कि उन्हें गले लगाने में निहित है। यह पुस्तक साहस, करुणा और अराजकता के बीच भी मौजूद सरल खुशियों के लिए एक नई प्रशंसा के साथ अपरिहार्य तूफानों को नेविगेट करने के लिए एक रोडमैप प्रदान करती है। मुख्य सबक में शामिल हैं: 1. जीवन का सामना करना जैसा कि यह है (कोई पलायन नहीं): कल्पना करें कि आप बारिश में फंस गए हैं। आप एक कमजोर आश्रय के नीचे दुबक सकते हैं, और लगातार भीगते और निराश होते जा रहे हैं। या, आप बारिश को स्वीकार कर सकते हैं और एक मजबूत छाता पा सकते हैं। "द विजडम ऑफ नो एस्केप" हमें छाता दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह करता है। जीवन निश्चित रूप से अप्रत्याशित मोड़ लाता है। उनसे बचने की कोशिश करना व्यर्थ है और अधिक तनाव पैदा करता है। पुस्तक हमें वास्तविकता को स्वीकार करना सिखाती है, यहां तक ​​कि अप्रिय भागों को भी, ताकि हम अधिक समझदारी से इससे निपट सकें। 2. कठिनाइयों को गले लगान...