निषेध का आकर्षण
#तिब्बत में एक फकीर था, मिलारेपा। उसके पास एक युवक आया और उसने कहा कि मुझे कोई मंत्र सिद्धि करनी है, मुझे कोई शक्ति अर्जित करनी है, मुझे कोई मंत्र दे दें। मिलारेपा ने कहा कि मंत्र हमारे पास कहां! हम तो फकीर हैं। मंत्र तो जादूगरों के पास होते हैं, मदारियों के पास होते हैं, तुम उनके पास जाओ। हमारे पास मंत्र कहां? हमारे पास सिद्धि का क्या संबंध? लेकिन वह युवक जितना ही उस साधु ने मना किया, उतना ही उस युवक को लगा कि जरूर यहां कुछ होना चाहिए, इसीलिए यह मना करता है। जितना साधु रोकने लगा और इनकार करने लगा उतना ही वह युवक साधु के पास जाने लगा। जो साधु डंडे से किन्हीं को भगाते हैं, उनके पास बहुत भीड़ इकट्ठी हो जाती है। जो गाली देते हैं और पत्थर मारते हैं, उनके पास भीड़ और बढ़ जाती है। क्योंकि जरूर यहां कुछ होना चाहिए, नहीं तो यह पत्थर मारेगा और डंडे मारेगा? लेकिन हमें पता नहीं है कि चाहे अखबार में खबर निकलवा कर बुलावाया जाए लोगों को, चाहे पत्थर मार कर, तरकीब एक ही है, प्रोपेगेंडा दोनों में ही एक है। और दूसरी तरकीब ज्यादा कनिंग से भरी है। जब पत्थर मार कर लोगों को भगाया जाए, तो लोगों के य...